क्या है उन्नाव का माखी रेप केस? कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा मिलने से जमानत मिलने तक, चुनाव के चलते मिली जमानत, जाएंगे सुप्रीम कोर्ट', सेंगर को जमानत मिलने पर पीड़िता ने उठाया सवाल

Dec 24, 2025 - 11:36
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क्या है उन्नाव का माखी रेप केस? कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा मिलने से जमानत मिलने तक, चुनाव के चलते मिली जमानत, जाएंगे सुप्रीम कोर्ट', सेंगर को जमानत मिलने पर पीड़िता ने उठाया सवाल

संकल्प विज़न /उन्नाव- जिले से चार बार विधायक रहे कुलदीप सिंह सेंगर की दिल्ली हाईकोर्ट से सजा निलंबित होने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है।आठ साल पहले देश विदेश तक में चर्चा बटोरने वाले माखी दुष्कर्म कांड ने राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था, जिसके बाद से वह आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।

2017 में दर्ज हुआ था केस

खुद को नाबालिग बताने वाली माखी की 17 वर्षीय किशोरी ने आरोप लगाया था कि 4 जून 2017 को कुलदीप सिंह सेंगर ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर आवास बुलाया और दुष्कर्म किया। घटना के बाद वह स्वजन के साथ माखी थाना पहुंची पर विधायक के प्रभाव में पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया।

जून 2017 से मार्च 2018 तक लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। तीन अप्रैल को पीड़िता के पिता को पीटा गया और कुलदीप सेंगर के प्रभाव में पुलिस ने उल्टे ही पिता को जेल भेज दिया। आठ अप्रैल 2018 को किशोरी ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किये.

2018 में पीड़िता के पिता की हुई थी मौत

आठ अप्रैल 2018 की रात पीड़िता के पिता की जेल में हालत बिगड़ गई थी। नौ अप्रैल को तड़के जिला अस्पताल में पिता ने दम तोड़ दिया था। इसी के बाद कुलदीप व उनके भाई अतुल समेत अन्य पर मुकदमा दर्ज हुआ। 13 अप्रैल 2018 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) को सौंप दी गई थी।

अप्रैल 2018 में कुलदीप सेंगर हुए गिरफ्तार

13 अप्रैल 2018 को सीबीआइ ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बुलाया और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। 28 जुलाई 2019 को दुष्कर्म पीड़िता स्वजन के साथ रायबरेली जेल में बंद अपने चाचा से मिलने कार से जा रही थी।

गुरुबख्शगंज के पास ट्रक ने पीड़िता की कार में टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में पीड़िता की चाची और मौसी की मौके पर मौत हो गई, जबकि पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के 15 माह बाद अधिवक्ता की मौत हो गई थी। परिवार ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया था।

अगस्त 2019 में मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा

एक अगस्त 2019 को उच्चतम न्यायालय ने मामले का खुद संज्ञान लेकर पूरा मामला यूपी से हटाकर दिल्ली तीस हजारी न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया। पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा देने के निर्देश भी जारी किए गए।

दिसंबर 2019 में केस तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर

20 दिसंबर 2019 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद कुलदीप सिंह सेंगर को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी करार दिया।

सेंगर को हुई उम्रकैद की सजा

21 दिसंबर 2019 को न्यायालय ने कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई और 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसमें से 10 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया।

मार्च 2020 को पीड़िता के पिता की मौत से जुड़े मामले में भी दिल्ली की अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर व सात अन्य को दोषी ठहराया और 10 साल की सजा व 10 लाख रुपये जुर्माना लगाया था।

एक अगस्त 2019 को दी गई थी सीआरपीएफ की सुरक्षा

एक अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता उनके स्वजन व दूसरे वकील को सीआरपीएफ की सुरक्षा दी थी। साढ़े छह साल से अधिक समय तक यह सुरक्षा बरकरार रही। इसके बाद तीन अप्रैल 2025 को सीआरपीएफ की सुरक्षा हटा दी गई। महज पीड़िता को दिल्ली यूनिट से सुरक्षा बहाल रखी गई।

थानाध्यक्ष व हल्का दारोगा को भी हुई थी सजा

दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में कुलदीप सेंगर उसके भाई अतुल के अलावा अन्य पर मुकदमा दर्ज हुआ था।

वहीं माखी एसओ अशोक भदौरिया व हल्का प्रभारी दारोगा केपी सिंह समेत अन्य पर हत्या की साजिश रचने, आर्म्स एक्ट में पिता को फर्जी तरीके से जेल भेजने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। सीबीआइ ने थानाध्यक्ष व दारोगा केपी सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

न्याय पालिका के निर्णय का सम्मान है : संगीता सेंगर

सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित किए जाने की जानकारी पर जब उनकी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमें दोपहर बाद इसकी जानकारी मिली है।

मैं लखनऊ से दिल्ली के लिए निकल रही हूं। न्याय पालिका के फैसले का पूरा सम्मान करती हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि न्याय पालिका से हमें न्याय मिलेगा।                                          चुनाव के चलते मिली जमानत, जाएंगे सुप्रीम कोर्ट', सेंगर को जमानत मिलने पर पीड़िता ने उठाया सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट के वर्ष 2017 के उन्नाव दुष्कर्म केस के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करने और जमानत देने के फैसले के खिलाफ पीड़िता ने अपनी मां और महिला एक्टिविस्ट योगिता भयाना के साथ मंगलवार देर शाम दिल्ली में इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया। पीड़िता ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि फैसला सुनकर बुरा लगा तो वहीं जान देने का फैसला लिया लेकिन परिवार के बारे में सोचकर रुक गई। हमारे साथ नाइंसाफी हुई है। अगर ऐसा दुष्कर्म आरोपी बाहर आएगा, तो हम कैसे सुरक्षित रहेंगे? सब असुरक्षित हो गए हैं। कहा- चुनाव के चलते उसे जमानत मिली है। वह अब न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी। हालांकि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए बैठी पीड़िता और अन्य प्रदर्शनकारियों को कुछ देर बाद ही इंडिया गेट से हटा दिया गया था।

पीड़िता ने इंडिया गेट पर कहा कि उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया है, ताकि उसकी पत्नी चुनाव लड़ सके। उसकी जमानत रद्द होनी चाहिए। कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करने के खिलाफ धरने पर बैठीं पीड़िता की मां ने कहा कि मेरा परिवार अब खतरे में है। हम देश की बहनों और बेटियों के लिए लड़ते रहेंगे और पीछे नहीं हटेंगे। उन्नाव दुष्कर्म केस के दोषी की सजा निलंबित करने पर महिला एक्टिविस्ट योगिता भयाना ने कहा कि उन्हें शुरू से ही बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। आज ऐसा क्या हो गया कि आरोपी को बेल मिल गई। दुष्कर्म के दोषी को बेल मिल रही है और बेगुनाह जेल में रखे जा रहे हैं। आज कोई उनके साथ नहीं खड़ा है।

पीड़िता की बहन ने कहा कि उसने मेरे चाचा को मारा और फिर मेरे पिता को फिर मेरी बहन के साथ यह घटना हुई और अब वह रिहा हो गया है। अगर उन्होंने उसे रिहा कर दिया है तो हमें जेल में डाल देना चाहिए। कम से कम हमारी जान वहां सुरक्षित रहेगी। मेरा एक भाई है, कौन जानता है कि वे उसके साथ क्या कर सकते हैं? उनके कई आदमी बाहर घूम रहे हैं, धमकियां दे रहे हैं, कह रहे हैं कि अब जब वह वापस आ रहा है तो तुम मेरा क्या कर सकते हो? मैं तुम में से हर एक को मार डालूंगा।

निर्भया की माँ ने कहा - नया नियम बनाया जा रहा है

सजा निलंबित होने पर निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि यह एक नया नियम बनाया जा रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए। आप 500 किमी दूर हों या घर पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क इससे पड़ता है कि आपने अपराध किया है और आपको सज़ा मिली है। कोर्ट को पीड़ित और उसके साथ जो हुआ, उसे ध्यान में रखते हुए इस पर निष्पक्ष सुनवाई करनी चाहिए। बिल्कुल भी बेल नहीं मिलनी चाहिए। उस परिवार को अभी भी खतरा है। कई बार ऐसा हुआ है कि निचली अदालत और हाई कोर्ट ने पीड़ित को सज़ा दी है, लेकिन फिर उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई। कोर्ट खुद ही मज़ाक बना रहा है कि ऐसा फैसला कैसे लिया जा सकता है।

इंडिया गेट पर प्रर्दशन किया

फैसले के खिलाफ पीड़िता और उसकी मां ने इंडिया गेट पर मंगलवार देर शाम को विरोध प्रदर्शन किया। साथ में महिला एक्टिविस्ट योगिता भयाना भी शामिल थीं। काफी मशक्कत और समझाने के बाद पुलिस ने उन्हें विरोध प्रदर्शन वाली जगह से हटाया। इसमे बाद इंडिया गेट समेत कई जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी।                                           कुलदीप भैया बाहर आ ही गए, एक एक से निपटा जाएगा...’, सेंगर की सजा निलंबन पर दुष्कर्म पीड़िता का बयान उन्नाव-  कुलदीप सिंह सेंगर की दिल्ली हाईकोर्ट से सजा निलंबित होने के बाद दुष्कर्म पीड़िता का दर्द छलक कर सामने आ गया है। उसने कहा कि इस निर्णय से उसकी मुश्किलें बढ़ गई है। कुलदीप सिंह सेंगर बाहुबली हैं। उसके परिवार को धमकियां मिलनी शुरू हो गई हैं। परिवार पर खतरा मंडराने लगा है। पिता की हत्या में जेल से छूटकर आए अन्य लोग धमकियां दे रहे हैं। कह रहे है कि अब तो मेरे कुलदीप भइया बाहर आ ही गए हैं, अब एक-एक से निपटा जाएगा। बता दें कि दुष्कर्म मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को राहत मिली है। लेकिन दुष्कर्म पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत मामले में उसकी अपील याचिका हाई कोर्ट में लंबित है। उस मामले में निर्णय आने के बाद ही वह जमानत पर बाहर आ सकेगा

आठ साल पहले देश विदेश तक में चर्चा बटोरने वाले माखी दुष्कर्म कांड ने राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था, जिसके बाद से वह आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। बता दें कि खुद को नाबालिग बताने वाली माखी की 17 वर्षीय किशोरी ने आरोप लगाया था कि 4 जून 2017 को कुलदीप सिंह सेंगर ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर आवास बुलाया और दुष्कर्म किया। घटना के बाद वह स्वजन के साथ माखी थाना पहुंची पर विधायक के प्रभाव में पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। जून 2017 से मार्च 2018 तक लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

पिता की मौत के बाद हुई गिरफ्तारी

तीन अप्रैल को पीड़िता के पिता को पीटा गया और कुलदीप सेंगर के प्रभाव में पुलिस ने उल्टे ही पिता को जेल भेज दिया। आठ अप्रैल 2018 को किशोरी ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया। नौ अप्रैल 2018 को तड़के पीड़िता के पिता की जेल में हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिला अस्पताल में पिता ने दम तोड़ दिया था। इसी के बाद कुलदीप व उनके भाई अतुल समेत अन्य पर मुकदमा दर्ज हुआ। 13 अप्रैल 2018 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) को सौंप दी गई थी। 13 अप्रैल 2018 को सीबीआइ ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बुलाया और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।

फिर उच्चतम न्यायालय ने लिया था संज्ञान

28 जुलाई 2019 को दुष्कर्म पीड़िता स्वजन के साथ रायबरेली जेल में बंद अपने चाचा से मिलने कार से जा रही थी। गुरुबक्सगंज के पास ट्रक ने पीड़िता की कार में टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में पीड़िता की चाची और मौसी की मौके पर मौत हो गई, जबकि पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के 15 माह बाद अधिवक्ता की मौत हो गई थी। परिवार ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया था। एक अगस्त 2019 को उच्चतम न्यायालय ने मामले का खुद संज्ञान लेकर पूरा मामला यूपी से हटाकर दिल्ली तीस हजारी न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया। पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा देने के निर्देश भी जारी किए गए।

तीस हजारी कोर्ट ने सुनाई थी सजा

20 दिसंबर 2019 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद कुलदीप सिंह सेंगर को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी करार दिया। 21 दिसंबर 2019 को न्यायालय ने कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई और 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसमें से 10 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया। मार्च 2020 को पीड़िता के पिता की मौत से जुड़े मामले में भी दिल्ली की अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर व सात अन्य को दोषी ठहराया और 10 साल की सजा व 10 लाख रुपये जुर्माना लगाया था।

एक अगस्त 2019 को दी गई थी सीआरपीएफ की सुरक्षा

एक अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता उनके स्वजन व दूसरे वकील को सीआरपीएफ की सुरक्षा दी थी। साढ़े छह साल से अधिक समय तक यह सुरक्षा बरकरार रही। इसके बाद तीन अप्रैल 2025 को सीआरपीएफ की सुरक्षा हटा दी गई। महज पीड़िता को दिल्ली यूनिट से सुरक्षा बहाल रखी गई।

थानाध्यक्ष व हल्का दारोगा को भी हुई थी सजा

दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में कुलदीप सेंगर उसके भाई अतुल के अलावा अन्य पर मुकदमा दर्ज हुआ था। वहीं माखी एसओ अशोक भदौरिया व हल्का प्रभारी दारोगा केपी सिंह समेत अन्य पर हत्या की साजिश रचने, आर्म्स एक्ट में पिता को फर्जी तरीके से जेल भेजने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। सीबीआइ ने थानाध्यक्ष व दारोगा केपी सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

न्याय पालिका के निर्णय का सम्मान है : संगीता सेंगर

सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित किए जाने की जानकारी पर जब उनकी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमें दोपहर बाद इसकी जानकारी मिली है। मैं लखनऊ से दिल्ली के लिए निकल रही हूं। न्याय पालिका के फैसले का पूरा सम्मान करती हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि न्याय पालिका से हमें न्याय मिलेगा।

मौसी बोलीं, बेटा निर्दोष था, उसे गलत फंसाया गया

सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित होने व जमानत मिलने पर उनकी मौसी सरोज सिंह का भी दर्द छलक कर बाहर आ गया। उन्होंने कहा कि आज मेरे पुत्र को उच्च न्यायालय ने सजा में राहत दी है। उन्हें साजिश में फंसाया गया। जिन्हें चार बार जनता ने विधायक बनाया वह इस तरह का घिनौना कृत्य कर ही नहीं सकता। ईश्वर व न्यायपालिका पर विश्वास था और आगे भी रहेगा। 

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