तेजी से बढ़ रहे POCSO के केस, सबसे ज्यादा UP में... महाराष्ट्र-एमपी का भी बुरा हाल

Dec 6, 2025 - 19:35
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तेजी से बढ़ रहे POCSO के केस, सबसे ज्यादा UP में...  महाराष्ट्र-एमपी का भी बुरा हाल

नई दिल्ली- देश में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की सुनवाई बेहद धीमी है। ताजा सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि पॉक्सो कानून के तहत 35,434 से ज्यादा मामले दो साल से अधिक समय से अदालतों में अटके पड़े हैं। लोकसभा में दी गई जानकारी से साफ है कि कई बड़े राज्यों में लंबित मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

वर्ष 2023 तक के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 10,566 मामले दो साल से लंबित हैं। इसके बाद महाराष्ट्र 7962, पश्चिम बंगाल 2003, तमिलनाडु 1910 और मध्य प्रदेश 1736 केस के साथ शीर्ष राज्यों में शामिल हैं।

किस राज्य में कितने केस

छत्तीसगढ़ में 375, राजस्थान में 224, बिहार में 1079, झारखंड में 315, पंजाब में 152, हरियाणा में 606, चंडीगढ़ में 16, हिमाचल प्रदेश में 101 और उत्तराखंड में 374 मामले दो साल से ज्यादा समय से लंबित है. 

2015 की तुलना में 2023 में लंबित मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। उदाहरण के तौर पर 2015 में यूपी में सिर्फ 26 केस पेंडिंग थे जो बढ़कर 10,566 हो गए। महाराष्ट्र में यह संख्या 48 से बढ़कर 7962, पश्चिम बंगाल में 55 से 2003, तमिलनाडु में 2 से 1910 और मध्य प्रदेश में 0 से 1736 पहुंच गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस जांच में देरी, साक्ष्य जुटाने में कठिनाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की धीमी रफ्तार इसका बड़ा कारण है। उनका कहना है कि सिर्फ अदालतें बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि पुलिस, प्रशासन और समाजतीनों को मिलकर काम करना होगा।

5 साल में 4.5 लाख से ज्यादा केस दर्ज

2021 से 2025 के बीच देश में पॉक्सो के 4.5 लाख से ज्यादा केस दर्ज हुए। इनमें यूपी सबसे ऊपर रहा जहां 1,31,692 मामले दर्ज हुए। महाराष्ट्र (76,409) और मध्य प्रदेश (32,548) दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। तमिलनाडु (39,099) और गुजरात (31,617) भी प्रमुख राज्यों में शामिल है.

कुछ पूर्वोत्तर राज्योंमिजोरम, नगालैंड, लद्दाख और अंडमान-निकोबारमें हर साल 0 से 11 के बीच ही मामले दर्ज हुए। देश में कुल 773 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट चल रहे हैं, जिनमें 400 अदालतें सिर्फ पॉक्सो मामलों की सुनवाई करती हैं। सितंबर 2025 तक ये अदालतें 3.5 लाख से ज्यादा केस निपटा चुकी हैं। केंद्रीय कानून मंत्री ने बताया कि पहली बार पांच और दस साल का राज्यवार डेटा एक साथ संसद में पेश किया गया है।

सरकार ने क्या जानकारी दी

काला धन अधिनियम, 2015 के तहत 1087 विदेशी अघोषित संपत्तियों पर 40,564 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, पिछले दस साल में कितना काला धन देश से बाहर गया, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सरकार के पास नहीं है।

‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’ के तहत 62 लाख गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। वहीं 96.5 लाख किशोरियों को माहवारी स्वच्छता पर काउंसलिंग दी गई। देश का इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम अप्रैल 2022 से AI टूल्स की मदद से बीमारियों के शुरुआती संकेत पकड़ रहा है और संभावित प्रकोप पर तुरंत अलर्ट जारी करता है। 

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