भाई के गुनाहों पर पर्दा डालने में मात खा गए कुलदीप सिंह सेंगर, पहुंचाया अर्श से फर्श पर... ✍️ जमानत कों चुनौती सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBI

Dec 27, 2025 - 10:48
Dec 27, 2025 - 10:53
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भाई के गुनाहों पर पर्दा डालने में मात खा गए कुलदीप सिंह सेंगर, पहुंचाया अर्श से फर्श पर... ✍️ जमानत कों चुनौती सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBI

संकल्प विज़न /उन्नाव :-  लगातार चार बार विधायक रहे सजायाफ्ता विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की तो आठ साल पुराना वाक्या फिर सामने आ गया। जिस कुलदीप को पीड़िता बाहुबली बताती है उनकी बर्बादी के पीछे काफी हद तक उनके भाई अतुल सेंगर का योगदान रहा। इसी भाई की वजह से कुलदीप की विधायकी तो गई ही दुष्कर्म के दोषी ठहराए जाने पर सामाजिक प्रतिष्ठा भी मिट्टी में मिल गई। वह आठ साल से सलाखों के पीछे हैं।

विधायक के रुतबे का सबसे ज्यादा गलत फायदा उनका छोटा भाई अतुल सेंगर उठाता था। विधायक के दबाव में पुलिस उसका साथ देती थी। पीड़िता के पिता को इसी भाई ने अपने लोगों से पिटवाया। आठ अप्रैल 2018 की रात पिता की जेल में हालत बिगड़ी तो जेल प्रशासन ने जिला अस्पताल भेजा था। नौ अप्रैल को तड़के 3:49 बजे पीड़िता के पिता की मौत हो गई थी। इसी के बाद कुलदीप की मुश्किलें बढ़ी और उनका कोई दांवपेंच काम न आया। पीड़िता व उसके परिवार को तुच्छ मानसिकता के लोग बताने वाले कुलदीप आठ साल से जेल की सलाखों के पीछे हैं।

कुलदीप के दबाव में पुलिस भी छिपाती रही भाई का गुनाह

चार बार के विधायक रहे कुलदीप का तिलिस्म इतना मजबूत था कि पुलिस उनके अनुसार ही हर कार्य करती थी। इसका उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब दुष्कर्म पीड़िता के पिता को कुलदीप के भाई अतुल सेंगर ने अपने लोगों से पिटवाया। इस मामले में पुलिस ने उल्टे पीड़ित के पिता को मारपीट व तमंचा रखने का आरोपित बना जेल भेज दिया था।

एएसपी रामलाल वर्मा को मारी थी गोली

कुलदीप के इसी छोटे भाई अतुल सिंह ने एक मामले की जांच कर रहे तत्कालीन एएसपी रामलाल वर्मा को 18 जुलाई 2004 में गोली मारी थी। घटना में विधायक के भाई समेत 20 पर जानलेवा हमला, 7 क्रिमिनल एक्ट में रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। हालांकि चार्जशीट के बाद मुकदमे की फाइल ही गायब हो गई। इसके बाद वर्ष 2014 में भी अतुल ने कानपुर में एक व्यक्ति को गोली मार दी थी। विधायक की ऊंची पहुंच के चलते यह मामला भी रफा दफा हो गया था। दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या में अतुल के साथ कुलदीप सेंगर को भी 10 साल की सजा हुई थी।

समर्थक बोले, कोर्ट ने तथ्यों को समझने के बाद ही लिया फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा कुलदीप की सजा निलंबित करने को लेकर जहां पीड़िता व उसके पक्ष के लोगों में उबाल हैं, वहीं समर्थकों का एक बड़ा खेमा कोर्ट के इस फैसले को सही करार देते हुए स्वागत योग्य बता रहा है। इंटरनेट मीडिया पर कुलदीप के समर्थक अपनी टिप्पणी देते हुए कह रहे हैं कि कुलदीप के पक्ष व उनके द्वारा दिए गए साक्ष्यों को न ही सीबीआइ ने सुना और न ही किसी कोर्ट ने। कुलदीप के राजनीति से जुड़े होने पर साक्ष्यों को नजरंदाज कर उन्हें सजा की दहलीज तक पहुंचा दिया गया। अब हाईकोर्ट ने कुलदीप के उन्हीं साक्ष्यों को देखा और सुना। इसके बाद अपना फैसला सुनाया है।

 *कुलदीप सेंगर की जमानत को CBI ने दी चुनौती, हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दी अर्जी* सीबीआई ने उन्नाव दुष्कर्म मामले के दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने शुक्रवार (16 दिसंबर) को सुप्रीम कोर्ट में एक स्पेशल लीव पिटीशन दायर की है, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें कुलदीप सेंगर की सजा को निलंबित करते हुए जमानत दे दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने दायर की SLP

सीबीआई ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है। एजेंसी का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश का अध्ययन करने के बाद यह तय किया गया कि इसे जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाए। सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर जमानत दी है, जो पीड़िता की सुरक्षा और न्याय के हित में उचित नहीं है। हालांकि, सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेंगे, क्योंकि वह दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में 10 साल की सजा भी काट रहे हैं।

इससे पहले शुक्रवार को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मां समेत महिला कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों से जुड़े कई लोगों ने दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की सजा निलंबित किए जाने के हाईकोर्ट के फैसले के कुछ दिनों बाद किया गया। पीड़िता की मां ने शुक्रवार को कहा था कि वह दोषी कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगी। 

जमानत के खिलाफ सड़क पर उतरी पीड़िता की मां

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एआईडीडब्ल्यूए) की कार्यकर्ताओं ने सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना और पीड़िता की मां के साथ मिलकर इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। पीड़िता की मां ने कहा कि वह अपनी बेटी के साथ हुए अन्याय के विरोध में यहां आई हैं।उन्होंने कहा, मैं पूरे हाईकोर्ट को दोष नहीं देती, लेकिन दो न्यायाधीशों के फैसले से हमारा भरोसा टूट गया है और मुझे गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि पहले न्यायाधीशों ने उनके परिवार को न्याय दिलाया था, लेकिन अब आरोपी को जमानत दे दी गई है।पीड़िता की मां ने कहा, यह हमारे परिवार के साथ अन्याय है। हम उच्चतम न्यायालय का रुख करेंगे, मुझे उस पर पूरा विश्वास है।

23 दिसंबर को हाईकोर्ट ने दी थी जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर को कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था। कोर्ट ने सेंगर को सख्त शर्तों के साथ जमानत दी, जिसमें पीड़िता के निवास से 5 किलोमीटर की दूरी बनाए रखना, पीड़िता या उसके परिवार को धमकी न देना और 15 लाख रुपये का मुचलका जमा करना शामिल है। सेंगर ने करीब साढ़े सात साल जेल में बिताए हैं। हालांकि, पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के अलग मामले में 10 साल की सजा के कारण सेंगर अभी जेल से बाहर नहीं आ सके हैं।

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